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By Khushi TDT

Released on May 1, 2025

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हुआ है पहली ये बार नी

पर मुझे आती अब दुनिया संभालनी

पहली जो रोती थी लोगों की बातों पे

देती है मिनटों में लोग सुधार भी

मैंने नी बोला कि बनना है best

पर बोलते लोग तो लेती हूँ मान भी

उन्हें गुमान वो आसमां है शायद जानते

नहीं रहता यहाँ एक चाँद भी

अब मुझे देख बता

और तू hustle को मेरी नी देख सका

आई scene में कोई नी झेल सका

कैसे आई मैं ये तुम्हें देखना था

यहाँ बातों से दिखती है लोगों की नियत

और नियत से तू मुझसे fake लगा

रोएगा अगर ये fail हुए वक्त रहते

ज़बान को break लगा

शब्दों का बहुत है मोल यहाँ

तभी तो बिकते हैं झूठ भी

किसी को पड़ता नहीं फर्क है सच क्या

बस चाहिए उनकी उम्मीद न टूटनी

या चेहरों पे दिखती वो भूख ही

एक ही है ज़िंदगी फिर नहीं है दूसरी

यहाँ करना पड़ेगा या मरना पड़ेगा

और मौका नहीं दूसरा कर सकते भूल नी

नी हैं ये कंधे भारी

अभी सर पे नी ऐसी कोई ज़िम्मेदारी

पर छोटी हूँ घर में ये चाहती हूँ

संभालूँ घर बड़े घूमे ये दुनिया सारी

मेरी माँ को नी चिंता हो

हर पल जिए खुलके हर दिन का वो

आज सोचते लोग क्या कहेंगे

कल बोले पापा कि कर तेरे दिल का जो

और कर रही हूँ कबसे ये जानके खुश

इन आँखों में एक अनजान सा सुख

फैसले कई थे गलत पर हाँ

मुझे कभी नहीं होता इस बात का दुख

मैं दवा को छोड़ लिया घाव को चुन

सुकून नहीं चाहिए हर बात को धुन

दर्द के पीछे की बात सुन

टूटे इतने हैं तू पाए ख्वाब नहीं बुन

तो

कोई नहीं बोलेगा फालतू

किसी की सुनूँ और सुनूँ मैं बात क्यों

मैं नहीं थी पहले से पर मेरे बाद तू

यही तो होता है मेहनत का जादू

सीखा नहीं जो कैसे वो गा दूँ

भागी मैं वहाँ से जहाँ रुका तू

मिली नहीं राह दिल बोला बना तू

कहनी हो बातें जब गाने बना दूँ

मरज़ी मेरी करके खुश

ज़्यादा सोचा जाता नहीं

बातें करने वाले करते हैं

मुँह रोका जाता नहीं

मैं तोड़ती गुरूर हूँ

दिल तोड़ा जाता नहीं

ये लेता भाँप चोरों को

दिल मेरा धोखा खाता नहीं

तभी तो

तभी तो आगे हूँ बहुत मैं

अभी नहीं जाऊँगी लौट के

अभी तो जीना है बाकी

ये अभी तो जीती है जंग मैंने मौत से

अभी तो मिला ही नहीं मुझे

शुरू से बैठी जो आई थी सोच के

छोड़ूँगी नामो निशान नहीं

वादा है आया जो सपनों को तोड़ने

क्योंकि मैं ज़्यादा नहीं सगी तेरी

तूने बोला था बस की नहीं लगी पड़ी

मेरे दिलो दिमाग पे छपी पड़ी

मैंने लिखा किताबें हैं भरी बड़ी

कभी नहीं बातें हैं बड़ी करी

हाँ मैं थकी थी तब भी मैं खड़ी रही

होती सालों पहले कहीं मरी पड़ी

तेरे सामने लड़की जो अभी खड़ी

ये

आई है आग से कूद के

जलोगे हाथ भी लगा जो भूल से

लाशें तो भूतों की बिछी यहाँ

पर कभी नहीं रंगे हैं हाथ मेरे खून से

मैं खेल वो खेलती नहीं

जो करे खिलाफ उसूल

मैं दूर से लूँ तेरे भाँप इरादे

और साथ तेरे हसूँगी झूठ पे

बदले तरीके हैं मैं नहीं

देखे हैं इतने साँप लगे भय नहीं

करूँगी क्या होता तय नहीं

भाई को छोड़ तू काफी है बहने ही

हाथ में mic कह लो ये गहने ही

मैंने ये पहने तो सोचो ये पैने ही

बातों से कब तक ही जीतेगा सोच ना

करके दिखा या तो सामने कह नहीं

सलाह या ज्ञान से चलता नहीं घर

लोग दे नोच जो जाऊँ मैं डर

आँखों में देख तो दिखे सब्र

अभी भूखी हूँ चैन से खाऊँगी फल

और रोक नहीं पाएगा चाहेगा भी

मेरे सामने आया तो जाएगा नहीं

पीछे से वार की आदत नहीं

तुझे दूँगी मैं ज़हर तू खाएगा भी

और सुन सुन तू खोल के कान

ये गाना नहीं आखिरी आखिरी बार

घर तक नहीं आएगी फैलती आग

मैं खड़ी हूँ इसी देहलीज़ के बाहर

उस बाप की तीन हैं बेटियाँ ताज

जीतूँगी जो भी वो करेगा राज

बदल के दूँगी मैं दौर बदल

मैं हूँ रोशनी काफी है एक दरार